महंगाई का ‘करंट’: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल से जनता बेहाल, सेस के बोझ ने बिगाड़ा बजट
हिमाचल में ₹102 के पार पहुंचा पेट्रोल, टैक्सी ऑपरेटर्स और दिहाड़ीदारों की बढ़ी मुश्किलें
धर्मशाला।
प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई ताजा बढ़ोतरी ने आम जनमानस की चिंताओं को गहरा कर दिया है। सरकार द्वारा ‘अनाथ एवं विधवा सेस’ लगाए जाने के फैसले के बाद ईंधन के दामों में आए उछाल से प्रदेश में महंगाई का एक नया दौर शुरू होने की आशंका है। जनता का स्पष्ट तर्क है कि सरकार को अतिरिक्त सेस थोपने के बजाय वैट (VAT) में कटौती कर राहत देनी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है।
ताजा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमतें 102 रुपये और डीजल 94.47 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई हैं। इस मूल्य वृद्धि ने न केवल निजी वाहन चालकों, बल्कि परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की भी कमर तोड़ दी है।
टैक्सी ऑपरेटर्स में गहरा रोष
टैक्सी चालक विजय सिंह का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में निरंतर हो रही वृद्धि ने उनके व्यवसाय को घाटे के सौदे में बदल दिया है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल 110 रुपये (कुछ क्षेत्रों में) तक पहुंच रहा है, जबकि सवारियां पुराना किराया ही दे रही हैं। एक तरफ एटीएस (ATS) की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा, वहीं दूसरी तरफ तेल के दाम बढ़ाकर सरकार हमारी मुश्किलें बढ़ा रही है।
आम आदमी और दिहाड़ीदारों पर दोहरी मार
दोपहिया वाहन का उपयोग करने वाले मनजीत सिंह ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि एक दिहाड़ीदार व्यक्ति, जो मुश्किल से 100 रुपये का पेट्रोल भरवाकर काम पर जाता है, उसके लिए यह बढ़ोतरी किसी आपदा से कम नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जनकल्याणकारी योजनाओं का वित्तीय भार गरीब और मध्यम वर्ग पर ही क्यों डाला जा रहा है?
बाजार पर पड़ेगा व्यापक असर
व्यावसायिक वाहन चालक संयम के अनुसार, तेल के दामों में वृद्धि का सीधा असर बाजार की बुनियादी वस्तुओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कभी दूध तो कभी तेल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। परिवहन लागत बढ़ने से हर चीज महंगी होगी। पंजाब से आने वाले दूध जैसे आवश्यक सामान की आपूर्ति और बिक्री पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
लगातार बढ़ती कीमतों से त्रस्त जनता अब सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और वैट में कटौती कर राहत देने की मांग कर रही है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि ईंधन के दामों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं और परिवहन सेवाओं के दामों में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है।



