हिमाचल प्रदेश

मेले समाज में एकता और भाईचारे को करते हैं मजबूत : परमार

भदरेड़ मेला ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, उमड़ा जनसैलाब

भदरेड़ (पालमपुर)।

प्रदेश के कांगड़ा जिला अंतर्गत भदरेड़ में आयोजित पारंपरिक मेला इस वर्ष ऐतिहासिक बन गया, जब इसने पिछले सभी वर्षों के रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए अभूतपूर्व भीड़ और शानदार आयोजन का उदाहरण पेश किया। मेले में हजारों की संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसे क्षेत्र का सबसे बड़ा और यादगार आयोजन बना दिया।

इस बार मेले की सबसे बड़ी विशेषता रही देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे नामी पहलवानों की भागीदारी। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से आए पहलवानों ने अपनी दमदार कुश्ती कला का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांच से भर दिया। एक से बढ़कर एक मुकाबले हुए, जिनमें निष्पक्ष निर्णय और खेल भावना ने लोगों का दिल जीत लिया। मेले में कुश्ती प्रतियोगिताओं के अलावा स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की भी झलक देखने को मिली। स्थानीय दुकानदारों, खान-पान के स्टॉल और पारंपरिक झूलों ने मेले की रौनक को और बढ़ा दिया। परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ मेले का आनंद लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विपिन सिंह परमार ने मेले की भव्यता और शानदार प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने भदरेड़ मेला कमेटी को 31,000 रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की, जिसे सुनकर उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक अरुण मैहरा कूका भी उपस्थित रहे और उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि भदरेड़ मेला क्षेत्र की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलती है। कार्यक्रम के दौरान जब “भारत माता की जय” के उद्घोष गूंजे, तो पूरा मेला परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया। उपस्थित जनसमूह ने पूरे जोश और उत्साह के साथ उद्घोष का जवाब देकर माहौल को और अधिक ऊर्जावान बना दिया।

मेला कमेटी के अध्यक्ष अजय सिंह सुपेहिया के नेतृत्व में आयोजन समिति ने इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समिति के सदस्यों की मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रबंधन के चलते मेले का आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। सुरक्षा, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसकी लोगों ने खुलकर प्रशंसा की।

मेले की सबसे बड़ी कुश्ती (बड़ी माली) भी बेहद रोमांचक रही, जिसमें नूर मजीठा ने जुम्मा शाहकोट को हराकर खिताब अपने नाम किया। इस मुकाबले ने दर्शकों में जबरदस्त उत्साह भर दिया और पूरे मैदान में तालियों की गूंज सुनाई दी।

समापन अवसर पर विपिन सिंह परमार ने विजेता पहलवान को 31,000 रुपए तथा उपविजेता को 21,000 रुपए की राशि भेंट की और औपचारिक रूप से मेले के समापन की घोषणा की। स्थानीय प्रशासन का भी इस आयोजन में सराहनीय सहयोग रहा, जिसके चलते इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रही। मेले के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सामूहिक प्रयास और समर्पण हो, तो किसी भी आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

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