महंगाई और ‘चंदा चोरी’ से ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्रगान की गरिमा से खिलवाड़ कर रही भाजपा: देवेंद्र जग्गी
विधानसभा में भाजपा की नारेबाजी को पूर्व मेयर ने बताया संवैधानिक मूल्यों पर हमला
धर्मशाला।
धर्मशाला के पूर्व मेयर देवेंद्र सिंह जग्गी ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रगान के दौरान भाजपा विधायकों द्वारा की गई नारेबाजी पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे न केवल सदन की गरिमा का उल्लंघन बताया, बल्कि इसे संविधान और राष्ट्र के प्रतीकों का अपमान करार दिया। जग्गी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत देश की आन, बान और शान के सर्वोच्च प्रतीक हैं, जिनका सम्मान करना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का संवैधानिक दायित्व है।
संसदीय परंपराओं का हवाला
भाजपा पर निशाना साधते हुए देवेंद्र जग्गी ने कहा कि आजादी के बाद से ही यह गौरवशाली परंपरा रही है कि सदन की कार्यवाही राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से शुरू होती है और समापन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के साथ होता है। यही परिपाटी देश की संसद में भी अपनाई जाती है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रगान के पवित्र क्षणों में नारेबाजी करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि भाजपा सदस्यों को कोई आपत्ति थी, तो उसे संसदीय नियमों के तहत उठाया जा सकता था, लेकिन राष्ट्रगान के समय हंगामा करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।”
असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की साजिश
पूर्व मेयर ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी जानबूझकर ऐसे विवाद पैदा कर रही है ताकि जनता का ध्यान ‘चंदा चोरी’, कमरतोड़ महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों से भटकाया जा सके। उन्होंने कटाक्ष किया कि जब भाजपा के पास जनता के बुनियादी सवालों का कोई जवाब नहीं होता, तो वह भावनात्मक और राजनीतिक हथकंडों का सहारा लेकर सदन के वातावरण को दूषित करती है।
सार्वजनिक माफी की मांग
देवेंद्र जग्गी ने मांग की है कि राष्ट्रगान के प्रति अनादर दिखाने के लिए भाजपा विधायकों को प्रदेश और देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा सर्वोपरि है। जग्गी ने भाजपा को आत्मचिंतन की सलाह देते हुए कहा कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रतीकों को राजनीतिक अखाड़ा बनाना बंद होना चाहिए।



