प्रधानमंत्री पद की गरिमा भूलकर अभद्रता पर उतरी कांग्रेस: विपिन सिंह परमार
मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण
पालमपुर।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए कथित अमर्यादित बयान की भाजपा के वरिष्ठ नेता, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलह विधानसभा क्षेत्र से विधायक विपिन सिंह परमार ने कड़े शब्दों में निंदा की है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान राजनीतिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाला और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। राजनीतिक दल अलग हो सकते हैं, विचारधाराओं में मतभेद हो सकते हैं और चुनावी मैदान में एक-दूसरे को चुनौती देना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर भाषा का स्तर इतना गिरा देना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और संस्कारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल भाजपा के नेता नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं और इस संवैधानिक पद की गरिमा का सम्मान करना प्रत्येक राजनीतिक दल और उसके नेतृत्व की जिम्मेदारी है। सत्ता पक्ष का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन देश के प्रधानमंत्री के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध समय-समय पर की गई अमर्यादित टिप्पणियां एक गंभीर राजनीतिक प्रवृत्ति बनती जा रही हैं। कभी प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व पर प्रहार, कभी उनके परिवार को निशाना बनाना और कभी उनकी स्वर्गीय माता के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां अब उनके स्वर्गीय पिता को लेकर ऐसी भाषा का प्रयोग करना राजनीतिक पतन की पराकाष्ठा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कांग्रेस की राजनीति में वैचारिक विरोध के लिए तर्क, तथ्य और जनहित के मुद्दे क्यों नहीं बचे हैं? क्या कांग्रेस नेतृत्व जनता के सामने अपने कार्यों और नीतियों का हिसाब देने के बजाय अपमानजनक बयानबाजी को ही अपनी राजनीति का हथियार बनाना चाहता है?
परमार ने मल्लिकार्जुन खड़गे से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने और देश की राजनीतिक मर्यादाओं के अनुरूप आचरण करने की अपेक्षा जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में चुनाव जीते और हारे जाते हैं, लेकिन भाषा, संस्कार और संवैधानिक पदों का सम्मान कभी नहीं हारना चाहिए।



