हम पैसा प्रदेश सरकार से मांग रहे हैं, सुखविंदर सिंह सुक्खू से नहीं: अतुल भारद्वाज
कहा, धर्मशाला और देहरा के लिए अलग-अलग मापदंड क्यों?
धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला परिसर के निर्माण और राज्य सरकार की ओर से 20 करोड़ रुपये देने के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयान पर विवाद गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री ने धर्मशाला दौरे के दौरान कहा था कि केंद्रीय विश्वविद्यालय कोई मुद्दा नहीं है और प्रदेश सरकार 20 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है। वहीं, समाजसेवी अतुल भारद्वाज ने मुख्यमंत्री के इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर प्रदेश की जनता की भावनाएं जुड़ी हैं और सरकार को इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
अतुल भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि केंद्रीय विश्वविद्यालय कोई मुद्दा नहीं है, उनकी व्यक्तिगत सोच हो सकती है, लेकिन विश्वविद्यालय के लिए लोग सड़कों पर उतरे हैं और धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर बार-बार अलग-अलग राशि का जिक्र कर रहे हैं। कभी 20 करोड़ तो कभी 30 करोड़ रुपये देने की बात कही जा रही है, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से अब तक ऐसी कोई आधिकारिक सूचना या अधिसूचना सामने नहीं आई है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितनी राशि लंबित है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 20 करोड़ रुपये देने की बात कह रहे हैं, लेकिन इसके साथ बिजली और पानी के खर्च केंद्र सरकार से वहन करने की शर्त रख रहे हैं। अतुल भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जब देहरा में केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर के लिए प्रदेश सरकार खर्च उठा रही है, तो धर्मशाला के मामले में अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में ऐसे संस्थानों के लिए प्रदेश सरकार की ओर से खर्च वहन किए जाने की व्यवस्था रही है।
अतुल भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि यदि प्रदेश सरकार 20 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है, तो इस संबंध में हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़े मामले में सरकार की ओर से अदालत में जवाब देने में देरी की जा रही है और अधिकारियों की ओर से भी समय पर पक्ष नहीं रखा जा रहा है। उन्होंने इसे अदालत के आदेशों की अवमानना बताते हुए कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए प्रदेश सरकार से किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर पैसा नहीं मांगा जा रहा, बल्कि जनता के टैक्स का पैसा मांगा जा रहा है। अतुल भारद्वाज के मुताबिक, विश्वविद्यालय का मामला जनता की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है तथा इसे राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
अतुल भारद्वाज ने कहा कि अब इस मामले को लेकर प्रदेश सरकार को अदालत में पक्षकार बनाया गया है और आगे की लड़ाई कानूनी तरीके से लड़ी जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यकाल को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आने वाले समय में जनता सरकार के कामकाज का हिसाब करेगी।



